भावुकता में बह जाऊँ मैं,
ये मुझको मंजूर नही है।
भीगी पलके खारे आंसू,
ये मेरी तकदीर नही है।
बढती जाती हूँ राहों पर,
संकल्पों को मन में दृढ कर,
रोक सके जो मुझको क्षण भर,
ऐसी कोई जंजीर नही है,
भीगी पलके खारे आंसू,
ये मेरी तकदीर नही है।
मेरी आशा, मेरे सपने,
मन में जागे अरमा कितने,
पा जाऊँ मैं लक्ष्य को अपने,
अब मंजिल मेरी दूर नही है।
भीगी पलके, खारे आंसू,
ये मेरी तकदीर नही है।
करती रहूँ लक्ष्य का पीछा,
जनको का मस्तक करने ऊँचा,
जो झुकी हो नजरें और सर नीचा,
ये मेरी तस्वीर नही है,
भीगी पलके, खारे आंसू,
ये मेरी तस्वीर नही है।
विचलित कर पाए जो पथ से,
या भर दे जो मुझको मद से,
मेरे हाथो में कह दो सब से,
ऐसी कोई लकीर नही है,
भीगी पलके, खारे आंसू,
ये मेरी तकदीर नही है..
Monday, December 8, 2008
तेरी याद............
यादों में तेरी खोये हुए ,
पता ही नही चला कब शाम हो गई।
एक आहट हुई, थोडी घबराहट हुई,
फिर सोचा, अब तो ये बात आम हो गई।
रोज चलती है ये पुरवाई और
अकेले रह जाते हैं मै और मेरी तन्हाई।
जी करता है तुझे अपना बना लूँ,
पर क्या करें?? राहें इतनी जो वीरान हो गई।
तेरा ख्याल जब भी आता है,
दिल में एक सैलाब सा लाता है।
जिस खुशी पे नाज़ था हमे,
वो खुशी ही हमसे अनजान हो गई।
क्या कहूँ के क्या फरेब खाया है??
गलतियाँ कर के देखो,,, मै भी तो बदनाम हो गई।
तुझसे कोई गिला नही मुझे ,
अब तो अश्क बहाती आँखे भी परेशान हो गई।
यादों में तेरी खोये हुए,,
पता ही नही चला कब शाम हो गई॥
पता ही नही चला कब शाम हो गई।
एक आहट हुई, थोडी घबराहट हुई,
फिर सोचा, अब तो ये बात आम हो गई।
रोज चलती है ये पुरवाई और
अकेले रह जाते हैं मै और मेरी तन्हाई।
जी करता है तुझे अपना बना लूँ,
पर क्या करें?? राहें इतनी जो वीरान हो गई।
तेरा ख्याल जब भी आता है,
दिल में एक सैलाब सा लाता है।
जिस खुशी पे नाज़ था हमे,
वो खुशी ही हमसे अनजान हो गई।
क्या कहूँ के क्या फरेब खाया है??
गलतियाँ कर के देखो,,, मै भी तो बदनाम हो गई।
तुझसे कोई गिला नही मुझे ,
अब तो अश्क बहाती आँखे भी परेशान हो गई।
यादों में तेरी खोये हुए,,
पता ही नही चला कब शाम हो गई॥
Sunday, December 7, 2008
तेरा साथ...
मुझे ज़िन्दगी मे और कुछ नही बस तेरा साथ चाहिए॥
हाथो में और कुछ नही बस तेरा हाथ चाहिए।
तू दीपक बनकर जलता रहे, मेरे इस घर आगन में।
तू खुशबू बनकर महकता रहे, मेरी ही इन सासों में।
पा कर तुझ को खो न दू, ये तेरा इकरार चाहिए।
मुझे ज़िन्दगी में और कुछ नही, बस तेरा साथ चाहिए।
तेरी बाहों में सर रख कर, काटूँ सारी रातों को,
तेरी राहों में दुनिया को, देखू सुरमई अखियों से।
तेरा करूँ मैं तुझको अर्पण, तो फिर क्या होगा मुझको ग़म।
बस तू ही मुझ से मुह मोड़ न ले, ये तेरा विश्वास चाहिए।
मुझे ज़िन्दगी में और कुछ नही, बस तेरा साथ चाहिए॥
हाथो में और कुछ नही बस तेरा हाथ चाहिए।
तू दीपक बनकर जलता रहे, मेरे इस घर आगन में।
तू खुशबू बनकर महकता रहे, मेरी ही इन सासों में।
पा कर तुझ को खो न दू, ये तेरा इकरार चाहिए।
मुझे ज़िन्दगी में और कुछ नही, बस तेरा साथ चाहिए।
तेरी बाहों में सर रख कर, काटूँ सारी रातों को,
तेरी राहों में दुनिया को, देखू सुरमई अखियों से।
तेरा करूँ मैं तुझको अर्पण, तो फिर क्या होगा मुझको ग़म।
बस तू ही मुझ से मुह मोड़ न ले, ये तेरा विश्वास चाहिए।
मुझे ज़िन्दगी में और कुछ नही, बस तेरा साथ चाहिए॥
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