इत्तेफाक से जो मिल जाओ अगर
तो मत पूछना वही अनकहे सवाल निगाहों से....
क्योंकि मेरी खामोशी फिर तुम्हे तोड़ देगी,
और मैं बिखर जाउंगी अपने जवाबो को समेटते समेटते.................!