यादों में तेरी खोये हुए ,
पता ही नही चला कब शाम हो गई।
एक आहट हुई, थोडी घबराहट हुई,
फिर सोचा, अब तो ये बात आम हो गई।
रोज चलती है ये पुरवाई और
अकेले रह जाते हैं मै और मेरी तन्हाई।
जी करता है तुझे अपना बना लूँ,
पर क्या करें?? राहें इतनी जो वीरान हो गई।
तेरा ख्याल जब भी आता है,
दिल में एक सैलाब सा लाता है।
जिस खुशी पे नाज़ था हमे,
वो खुशी ही हमसे अनजान हो गई।
क्या कहूँ के क्या फरेब खाया है??
गलतियाँ कर के देखो,,, मै भी तो बदनाम हो गई।
तुझसे कोई गिला नही मुझे ,
अब तो अश्क बहाती आँखे भी परेशान हो गई।
यादों में तेरी खोये हुए,,
पता ही नही चला कब शाम हो गई॥
9 comments:
TRUE LOVE........very touching. bahut achhi lines hain...
simply gr8....... intzaar kya hota hai, bahut khoobsurti se bataya hai...keep it up..
MiNdBLoWiNg.................
really nice ......gud work
Aapki ye rachna atulniya hai...prayas jaari rakhiye....
Shubhkamnayain...!!!
Kavi PRADEEP
dil ko chhoone waali rachna
Achchi kavita hai. Aap ab behtar likh rahi hain. Lekin 13th line me 'kya fareb khaya hai' me khaya ki jagah agar koi doosra word use karen to behtar hoga. kyuki fareb khana is not a right word. just think about it. at the end LOVELY POEM.
http://meri-yaaden.blogspot.com
very nice
मेरी यादो को पर मिल गए है....
जैसे बेघरो को घर मिल गए है....
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ना रखना हो तो मेरी बात मत रखो,
पर मेरी दुखती रगों पर हाथ न रखो,
कल तक जिसे ढूंढा मैंने सरेआम राह पर,
उन्हें तुम हमेशा मेरे साथ न रखो,
उनसे भी कहीं अच्छे रहबर मिल गए है
.... मेरी यादो को पर मिल गए है.....
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