bhumika bhandari agarwal
Sunday, June 19, 2011
ग़म तल्खियो मे जीना, खुद से वफ़ा नहीं है।
अपनी ही सोच बदलो, किस्मत खफा नही है।
भवरो की गुनगुनाहट, फूलो की खिलखिलाहट,
अपना भी हक है इनमे, कोई खता नही है।
जल जल चिराग बनना, रातो से हमने सीखा।
दीपक तले अँधेरे पर, चलना हमने सीखा।
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