एक बे-वफ़ा की नजरो में
वफ़ा तलाश रहे थे हम।
थी ख्वाइश की उन्हें अपना बना कर रखे,
पर सिर्फ तमन्नाओ में जी रहे थे हम।
कुछ खबर थी, और कुछ थे बे-खबर,
पर सबकी बातो पर थी हमारी नज़र।
जान के भी अनजान बन रहे थे हम।
वो दूर से इशारा कर रहे थे,
और हम पास आने का बहाना कर रहे थे।
सूनेपन के एहसास को शायद भर रहे थे हम।
एक बेवफा की नजरो में वफ़ा तलाश रहे थे हम.
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